Face kitab

Tuesday, August 27, 2019

अज्ञानता और अहंकार का एहसास !

https://hiddensole.blogspot.com/
Vikrant Kumar
🔃 संतो के सामने घमंड 🔃

      शेख फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रुहानियत की गहरी लगन थी। उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था,जो राजस्थान के 1 शहर अजमेर में रहते थे। उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुंचे तो देखा कि वह एक सूखे पेड़ का सहारा लेकर बैठे हैं ।
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwiyiPKmnqTkAhUm4nMBHcioAl0QjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fpixabay.com%2Fphotos%2Ftree-dead-dry-old-trunk-nature-2487889%2F&psig=AOvVaw2RO95wZvn-X1b7Elk7BVaR&ust=1567036012052069
Google Free Photo

 फरीद को इस बात का बहुत हैरानी हुई कि एक काबिल फकीर ने पेड़ का सहारा लिया हो और वह पेड़ फिर भी सूखा हो ! उन्होंने अपनी योग शक्ति का उपयोग करते हुए सूखे पेड़ पर दृष्टि डाली और वह एकदम हरा हो गया ।
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwi7wqqsoaTkAhWSSH0KHUikAYEQjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fpxhere.com%2Fen%2Fphoto%2F1368874&psig=AOvVaw2hJDaQOZN8DRDrqjMVMR2h&ust=1567036828051325
Google Free Photo
 ख्वाजा साहि ने यह सब देखा और पेड़ पर नजर डाली और पेड़ पहले की तरह सूख गया। फरीद नहीं चाहता था कि इसी तरह सुखा रहे। उन्होंने एक बार फिर उसे हरा कर दिया और ख्वाजा साहिब ने पल भर में उसे वापस उसी हालत में पहुंचा दिया ।
                 ख्वाजा साहिब फरीद की ओर मुड़े और बोले, "बेटा, तुम यहां रूहानी राज जानने और मालिक से मिलाप करने के लिए आए हो या कु के कानून में दखल देने के लिए ? परमात्मा के हुक्म से ही यह पेड़ सूख गया है। तुम कुदरत की व्यवस्था में दखल देकर इस सूखे पेड़ को बार-बार हरा क्यों करना चाहते हो ? जाओ अब तुम दिल्ली में कुतुबुद्दीन बख्तियार काफिर के पास जाओ,⋙ वही तुम्हारे मन की हालत देखकर तुम पर बख्शीश करेंगे ।
                    हुक्म के अनुसार फरीद दिल्ली पहुंच गए। वहां पहुँचकर क्या देखते हैं कि कुतुबुद्दीन जो उस समय अभी बालक ही थे,अपने साथियों के साथ खेल रहे थे। कुछ देर तक सन्देहपुुुर्ण दृष्टि से फरीद उन्हें देखते रहे फिर अपने मन में सोचा, "यह नादान बालक भला मुझे क्या शिक्षा देगा ।
मैं Online Business करता हुं।आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है।
                                   हज़रत कुतुबुद्दीन देखने में तो बालक थे, लेकिन उनकी रूहानी अवस्था ऊंची थी । खेल छोड़कर वे पास की कोठरी में गए और 1 मिनट के बाद ही सफेद लंबी दाढ़ी वाले बुजुर्ग के रूप में बाहर आ गए और कहने लगे कि "अब तो तुम्हारा मुर्शीद बनने के लिए पूरा बुजुर्ग और समझदार दिखाई देता हूँ ? फरीद को अपनी अज्ञानता और अहंकार  का एहसास हो गया और शर्म से उसकी गर्दन झुक गई। घुटनों के बल गिर कर उन्होंने अपनी भूल स्वीकार की और दया की भीख मांगी
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwiPjtzOqqTkAhVDg-YKHe9dBeUQjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fhi.kingdomsalvation.org%2Fthe-fragrance-of-love-given-off-in-adversity.html&psig=AOvVaw2DHe9CsRNdHudN2V6gzePN&ust=1567039096730496
ग़ुगल कोस्टली फोटो
फिर उनकी संगति में रहकर उनके सच्चे शिष्य बने और समय बीतने पर खुद काबिल फकीर बने।




 संतों की संगति का लाभ प्राप्त करने के लिए दीनता और नम्रता आवश्यक है ।
  1. जो बोला सही बोला !
  2. जीवन लम्बा नही , महान होना चाहिये !
  3. My All Story !


No comments:

Post a Comment

सब मैं हि करूँ तो आप क्या करेंगे !

फ्री में ऑनलाइन पैसे कमाने के 10 तरीके,by-AI

  आजकल इंटरनेट के जरिए पैसे कमाना बहुत आसान हो गया है, और इसके लिए आपको किसी बड़े निवेश की जरूरत नहीं है। अगर आप भी फ्री में ऑनलाइन पैसे कमा...